मानसिक तनावों से जर्जर होता आज़ का मनुष्य सन्तोष और आनन्द की तलाश में इधर-उधर भटक रहा है। शांति का अहसास महसूस करने के लिए मानसिक तनावों से जर्जर होता आज़ का मनुष्य सन्तोष और आनन्द की तलाश में इधर-उधर भटक रहा है। शांति का अहसास महसूस करने के लिए उत्तावला हो रहा है इन्सान। वह अपनी जीवन बगिया के आसपास से स्वार्थ, क्रोध, कटुता, ईर्ष्या, घृणा आदि के काटों को दूर कर देना चाहता है। उसे अपने इस जीवन रूपी उद्यान में सुगंध लानी है। उसे उस मार्ग की तलाश है जो उसे शरीर से दृढ और बलवान बनाये, बुद्धि से प्रखर और पुरुषार्थी बनाये, भौतिक लक्षणों की पूर्ति करते हुए उसे आत्मवान बनाये। निश्चित रूप से इस मार्ग है। इसे भारत के महाऋषियों, महापुरुषो ने योगदर्शन का नाम दिया है।

इस भौतिकवादी क्लेशमय जीवन में योग की सबसे अधिक आवश्यक्ता है। थोड़ा सा नियमित आसन और प्राणायाम हमे निरोगी तथा स्वस्थ रख सकते हे। यम-नियमो के पालन से हमारा जीवन अनुशासन से प्रेरित हो चरित्र में ध्यान के अभ्यास से वह न केवल तनावरहित होगा, और कार्य-कुशलता में पारंगत भी हो पायेगा।

योग का दैनिक जीवन में महत्व

यह प्रमाणित तथ्य है कि योग मुद्रा, ध्यान और योग में शवसन की विशेष किर्याओं द्वारा तनाव से राहत मिलती है, योग मन को विभिन्न विषयों से हटाकर स्थीरता प्रदान करता है और कार्य विशेष में मन को स्थीर करने ने सहायक होता है। हम मनुष्य किसी चीज़ की और टीबी आकर्षित होते है, जब उनसे हमे लाभ मिलता है।जिस तरह से योग के प्रति हम लोग आकर्षित हो रहे है, वह इस बात का संकेत है कि योग के कई फायदे है। योग न केवल हमारे शरीर को, बल्कि मन और आत्मिक-बल को सुदृढ़ और संतुष्टि प्रदान करता है। दैनिक जीवन में भी योग के कई फायदे है। आइये, इनसे परिचित होते है-

स्त्री पुरूष, बच्चे, युवा, व्रद्ध सभी के लिए योग लाभप्रद और फायदेमंद है । शारीरिक क्षमताओं एवं लोच के अनुसार योग में परिवर्त्तन और बदलाव किया जा सकता है । अर्थात् किसी भी स्थिति में योग लाभप्रद होता है।

 मन और भावनाओं पर योग

जीवन में सकारात्मक विचारों का होना बहुत आवश्यक है । निराशात्मक विचार असफलता की ओर ले जाता है। योग से मन में सकारात्मक उर्जा का संचार होता है। योग से आत्मिक बल प्रात होता है और मन से चिन्ता, विरोधाभास एवं निराशा की भावना दूर हो जाती है। योग से मन को आत्मिक शांति एवं आराम मिलता है जिससे मन में प्रसन्नता एवं उत्साह का संचार होता है और इसका सीधा असर व्यक्तित्व एवं सेहत पर होता है।

तनाव से मुक्ति

तनाव अपने आप ने एक बीमारी है जो कईं अन्य बीमारियों को निमत्रण देता है और इस तथ्य को चिकित्सा विज्ञान भी स्वीकार करता है। योग का एक महत्त्वपूर्ण फायदा यह है कि यह तनाव से मुक्ति प्रदान करता है। तनाव-मुक्त होने से शरीर और मन पर सकारात्मक प्रभाव पडता है और कार्य करने की क्षमता भी बढ़ती है।

‘अंतराष्ट्रीय योग दिवस’ को मनाये जाने की पहल भारत के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने 27 सितम्बर, 2014 को ‘संयुक्त राष्ट्र महासभा’ में अपने भाषण में रखकर की थी, जिसके बाद ’21 जून‘ को ‘अंतराष्ट्रीय योग दिवस‘ घोषित किया गया। 11 दिसम्बर, 2014 को संयुक्त राष्ट्र में 193 सदस्य देशो द्वारा 21 जून को ही ‘अंतराष्ट्रीय योग दिवस’ को मनाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली। प्रधानमंत्री मोदी जी के इस प्रस्ताव को 9o दिन के अंदर ही पूर्ण बहुमत से पारित किया गया, जो संयुक्त राष्ट्र संघ में किसी दिवस को प्रस्ताव के लिए सबसे कम समय है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के प्रस्ताव का 177 देशों ने समर्थन किया था।

मानसिक क्षमताओं का विकास

स्मरण-शक्ति एवं बौद्धिक क्षमता जीवन में प्रगति के लिए प्रमुख साधन माने जाते हैं। योग से मानसिक क्षमताओं का विकास होता है ओंर स्मरण शक्ति पर भी गुणात्मक प्रभाव होता है । योग मुद्रा और ध्यान मन को एकाग्र करने में सहायक होता है। एकाग्र मन से स्मरण शक्ति का विकास होता है। प्रतियोगिता परीक्षाओं में तार्किक क्षमताओं पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं । योग तर्क शक्ति का भी विकास करता है एवं कोशल को भी बढ़ाता है। योग की क्रियाओं द्वारा तार्किक शक्ति एवं कार्यं कुशलता में गुणात्मक प्रभाव होने से आत्मविश्वास भी बढता है।

शरीर में लोच

योग से शरीर मजबूत और लचीला होता है । योग मासपेशियों को सुगठित और शरीर को संतुलित रखता है। सुगठित, संतुलित और लोचदार शरीर होने से कार्य क्षमता में भी बृद्धि होती है। कुछ योग मुद्राओं से शरीर की हड्डियां भी पुष्ट और मजबूत होती हैं। यह अस्थि सम्बन्धी रोग की संभावनाओं को भी कम करता है।

सेहत और योग

योग शरीर को सेहतमंद बनाए रखता है और कई प्रकार की शारीरिक और मानसिक परेशानियों को दूर करता है। योग श्वसन क्रियाओं को सुचारू बनाता है। योग के दौरान गहरी साँस लेने से शरीर तनाव-मुक्त होता हे। योग से रक्त संचार भी सुचारू होता है ओर शरीर से हानिकारक टॉक्सिन निकलते हैं। यह थकान, सिरदर्द व जोडों के दर्द से राहत दिलाता है एवं ब्लड प्रेशर को सामान्य बनाए रखने में भी सहायक होता है।

21 जून ही क्यों अंतराष्ट्रीय योग दिवस ?

21 जून को ही अंतराष्ट्रीय योग दिवस बनाए जाने के पीछे एक वजह है कि इस दिन ग्रीष्म सक्रांति होती है। इस दिन सूर्य धरती की दृष्टि से उत्तर से दक्षिण की ओर चलना शुरू करता है। यानी सूर्य जो अब तक उत्तरी गोलार्ध के सामने था, अब दक्षिणी गोलार्ध की तरफ बढना शुरू हो जाता है। योग के नजरिए से यह समय ‘संक्रमण काल’ होता है, यानी रूपांतरण के लिए यह बेहतर समय होता है। साथ ही 21 जून पूरे केलेंडर वर्ष का सबसे लम्बा दिन है। प्रकृति, सूर्यं और उसका तेज इस दिन सबसे अधिक प्रभावी रहता है।

ध्यान से ज्ञान आता है; ध्यान की कमी अज्ञानता लाती है। अच्छी तरह जानो कि क्या तुम्हे आगे ले जाता है और क्या तुम्हे रोके रखता है, और उस पथ को चुनो जो ज्ञान की ओर ले जाता है।

महात्मा बुद्ध

यह योग उसके लिए संभव नहीं है जो बहुत अधिक खाता है , या जो बिलकुल भी नहीं खाता ; जो बहुत अधिक सोता है , या जो हमेशा जगा रहता है।

भगवद गीता

1 COMMENT

  1. Is there any hard copy of Swadeshi Patrika existing? If yes then let me know how to subscribe online and way to pay online.

    I am heavily indebted to Lt. Rajiv Bhai for getting multifarious knowledge by him. He is undoubtedly in carnation of supreme power.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here